तेरे बिन थिर रहे ना ये मन हे रामा,
वस में रहे ना ये दिल हे मोरे रामा,
तू घट-घट वासी जाने सो ज्ञानी हे रामा...
तू प्रकट जिस घट सोहीं पंडित ह� read more >>
बारिश की बूंदों को देख,
मन कितना आनंदित हो जाता हैं l
और उन बूंदों में मन ,
ये भीगने को चाहता हैं l
रोक नहीं पाती हूँ मैं ख़ुद को ,
जब बार� read more >>