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जब तू आता है नज़र-ए-रूह मिलता है
"जब तू आता है, जब तू मिलता है, नज़र-ए-रूह मिलता है,, जब तू आता है"!!!! -मोती
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ख़ुद को जानना- सर्वश्रेष्ठ ज्ञान
"कुछ जानने- और कुछ पाने की, इच्छा का सर्वश्रेष्ठ मार्ग ख़ुद को जानने में निहित है"!!!! -मोती
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देखा एक को क़रीब से-हर शय- देखा करीब से
"ख़ुद को- देखा क़रीब से"! "हर शय- देखा करीब से"! "बूंद चखा- सारा समुद्र क़रीब से"!! "देखा- एक को क़रीब से"....!!!! -मोती
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प्रकाश- मन के अन्दर जो प्रकाश है
कभी-कभी छोटी-छोटी खुशियाँ हमारे लिए न जाने कितनी बड़ी होती है शायद ही दूसरों की नजरों में उनकी कोई अहमियत ना रहे लेकिन हमारे लिए वह बह�
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माटी अचरज- अचरज यह माटी
माटी अचरज- अचरज यह माटी... मान अभिमान वैभव रूप यह माटी,, काया है माया- छाया का अहंकार... माटी अचरज- अचरज यह माटी....!!!! -मोती
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यूंहीं जीवन क्यों- ख़्वाहिशों ही ख़्वाहिशों में गुज़र जाते हैं
यूंहीं- सोचा करता हूं ये, वक्त क्यों गुज़र जाते हैं जगत में- क्यों आते वक्त के, साथ क्यों गुज़र जाते हैं यूंहीं- जीवन क्यों ख़्वाहिश
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सुकून-सुकून नहीं मिलता जब मनुष्य अपनी गलतियों से सबक नहीं लेता
सुकून नहीं मिलता, जब मनुष्य अपनी गलतियों से सबक नहीं लेता।। हमें जो देखकर जीता उसको तड़पाने पर अपना सुकून खोता।। बच्चों को भूख से तड
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अगर तुम नही तो जिंदगी शमसान तू
गर तुम नही तो जिंदगी शमसान तू ए हमनशी इस जीस्त की पहचान तू तू जिंदगी तू हमबदन तू रूह है हमराह मुझको मत समझ अनजान तू मायूसियों की इक लह
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तराशने की कला-एक बेशक़ीमत हक़ीक़त
तराशने वाले पत्थरों को भी तराश देते हैं , नासमझ हीरे को भी पत्थर क़रार देते हैं । ठंडे दिमाग़ से सोचो , तराशे जाने पर क्या पत्थर को हुआ क�
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भूले भटके चौरासी- ये इनायत मानव देह
"भूले-ए-भटके चौरासी तू- मानव देह इनायत ख़ुदा का" "ज्ञान चेतन को सद्गुरु देई- मंजन फल-पल में गोविंद मिलाई"!! -मोती
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माया के माया में मुसाफ़िर- अपना रास्ता-ए-मंजिल भूल जाता है
मुसाफ़िर- घिरा माया में, अपना रास्ता भूल जाता है... माया के- माया में हम, अपना मंज़िल भूल जाते हैं!!!! -मोती
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ये जीवन है क्या- चल रहा हूं बिना राह पता नहीं
ये जीवन- है क्या पता नहीं... खोज रहा- हूं क्या पता नहीं... चल रहा- हूं बिना राह पता नहीं... मौत- या ज़िंदगी पता नहीं....???? -मोती
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