गीत- आ कहीं ओर चलें।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
कोई तुझको ना चुरा ले, आ कहीं ओर चले।
कोई वापस ना बुला ले, आ कही ओर चले।
चांद तारों से परे भी, त� read more >>
हां प्यार में कभी खिचखिच तो कभी किशमिश है,
होता है क्योंकि मन है समान तो रहता ही नहीं,
आज के आधुनिक युग में भागम भाग है,
ध्यान और ख्याल इ� read more >>
एक नजर जो पड़ी उन पर तो ये नजर भी रुक गयी ।
उसने एक बात तलक न बोली पर दिल में डायरी छप गयी।
वो दिखाना चाहते थे हमे अपना गुस्से से लाल चेहरा � read more >>
आया सावन झूम के, निर्मल हो बरसात।
कोयल गाती गीत है, मधुर मिलन की रात।।
आया सावन झूम के, बादल गरजे घोर।
पवन मस्त है रूप में, नई लगी है भोर� read more >>