मेरी खामोशी तुमसे कुछ कहना चाहती है
पर बात जुबां तक आते - आते रुक - सी जाती है
तुम मेरे हो या किसी और के
दिल में सवाल यहीं बार - बार उठ जाती read more >>
अजीब - सी कशिश है,तुममें
जो मैं तेरी ओर खींची चली आती हूं
न चाहते हुए भी तेरे ही बारे में सोचती हूं
एक नज़र देखने के लिए मेरी नजर बेकरार � read more >>
वक़्त ,की ,मुलाकात ,लिख रही हूँ,।
किसी ,से ,अधूरा, रहा ,साथ लिख रही हूँ,।
लिखावट,का तलबगार रहा कलम,।
मैं तो बस अपना इक हाथ लिख रही हूँ,।
कहीं read more >>