हर शाम क्यूं छत से देखती हो...
कुछ कहना है तो कह दो ना!
अगर तुम्हें डर लगती है...
तो फिर चिट्ठी ही लिख कर देदो ना!!
जब भी तुम्हें देखा है मैं� read more >>
कम हो गया है मरतबा इश्क़ का आज ,
जिस पर खुदा को था बहुत ज्यादा नाज़ ।
गर रहता मोईन, इश्क ए जुनून उधर अब भी सवार,
तो यूं ही ख़त्म न होजाती दुनिय� read more >>