तेरे नाम से इस कदर रोया आज ---2
तुम रुह हो मेरी --
मैं जिस्म हूँ तेरी ,
तुम बिन कैसे जीऊँगा ,
लौट के आ जाओ ---2
तुम बिन अधूरा हर साज़ ,
करो दास्ताँ � read more >>
किसे सुनाऊँ दास्ताँ ग़म की ---2
आज भी रुला जाती है ,
रवानी शाम की ---
कहकशाँ सी धुंधली सूरत ---2
जहाँ में तुम आफ़ताब ईद का ,
बेताब है दिन , बेचैन रा� read more >>
गम को भूलाने की बहाने बहुत की ---2
आलम में मुस्कुराना है ,
दामन में काटें को खिला के ---2
होठों में गुलशन को खिलाया हूँ ,
बहाने की बहुत तुझे भ� read more >>
आप की ख़त को ,आज पढ़ रहा हूँ।
इतना लिखी हो ख़त ,,की सुबह-शाम पढ़ रहा हूँ।।
इक़्श में बीते सुख-दुःख आज ख़त में पढ़ रहा हूँ।
जो बीत था पल इक़्श का ,व� read more >>