न जाने क्यों सब कुछ होते हुए भी मन कभी-कभी बहुत दुखी हो जाता है और ऐसा लगता है कि खुशी तो हमारे पास है ही नहीं उस समय हमें घर से बाहर निकल क read more >>
बहुत कोशिश है कि तुम्हें भूलने की
न
जाने क्यों ?तुम दिल से निकलते नहीं हो !कई बार ऐसा महसूस होने लगा है !
तुम ही शब्द !
बनकर आते हो जुबां !
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ऐ मन तु अपनी मर्जी क्यों चलाता रहा !
तू चाहता क्या है?
यह कभी तो मुझे भी बता ।
जब भी सोचता हूं !
मैं कुछ तुम मुझे और ही किसी राह पर ले जाता र read more >>
रूठते थे हम भी कभी बच्चों की तरह !
अपनी चोटी को ठीक से बनाने की जिद करते थे हम भी कभी।
हंसते थे कभी खिलखिला कर। राह पर यूं ही ।
रहते थे मस� read more >>
कोई चाहत नहीं है मुझ में !
कोई उम्मीद भी नहीं है मुझ में! शायद !इसीलिए जिंदगी मेरी वीरान है !
कोई आस भी नहीं है! जितना मिल जाए वह भी बहुत है ! read more >>
क्या लिखूं !मन मौन है !पर लिखने को भी मन बेचैन है!
उलझन है मेरी उसको मैं !
ना सुलझा सकी !
राह के एक पत्थर को भी मैं
ना हिला सकी दर्द से कराह� read more >>