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ऊँच-नीच
कहानी ऊँच-नीच बिहार राज्य के नालन्दा जिले में रसलपुर नाम का एक गाँव है जहाँ भिन्न- भिन्न जाति के लोग रहते
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हर्जाना
शीर्षक- हर्जाना रीता अपने पति के साथ एक गाँव में रहती हैं I उसका एक बेटा रंजन सरकारी सेवा में हैं I वह पटना में रहता हैं I उसकी बेटी की शा�
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संपत्ति
कहानी शीर्षक : संपत्ति राधा की सास घर में झाड़ू लगा रही थी। मन में बहुत सारे विचार चल रहे थे I एक जमाना था जब पति को परमेश्वर माना ज�
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नदी के किनारे बसा हुआ गांव
नदी किनारे बसा वह गाँव नदी के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव दूर से देखने पर किसी चित्र की तरह लगता था। सुबह होते ही नदी के पानी पर सूरज की स
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कलयुग का अपराधी
कलयुग का अपराधी मैं अपने पापो का अघाती हूं, मैं सिर्फ तेरे सुख में तेरा साथी हूं, हा मैं जानवरो को काटके खता हु, मैं ही तो कलयुग का अपराध
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स्कूल की रसोइयां पर कविता
स्कूल की रसोइयां राह देखते हैं बच्चे जिनके आने की आस लगाए बैठे रहते भोजन बन जाने की, प्यार परोसा जाता तेरा हर थाली में फिर मिटती है �
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"પોતાની દિશા"
સમયની ચાલને સમજીને ચાલવાની વાત છે, અંધકાર વચ્ચે દીપક બનીને ચાલવાની વાત છે. દરેક ચમકતી વસ્તુને સોનું માનશો નહીં, વિવેકની આંખે દુનિયા
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मजबूरियां का नाम हमने शौक रख दिया
जिस रास्ते पे चल रहे उस पर है छल परे कुछ देर के लिए माथे पे बल परे हम सोचने लगे कि लौट चले क्या फिर सोचा यार छोड़ो चल परे तो चल परे मुश्�
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असफलता ही सफ़लता की पूंजी है
मेहनत बिना कोई काम नहीं, हार कर मुंह मोड़ना ठीक नहीं। मानवीय कानों में यह बात नहीं गूंजी, कि असफलता ही सफ़लता की है पूंजी।। हमे हमेशा
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हे! मानव
हे! मानव हे! मानव तुमने हमको पाला पोसा पेड़ लगाया दाना खिलाया परिवार का एक अंग बनाया, हमें गर्व था हम इंसानों के बीच में हैं तुम्हे
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### मेहर रब दी
तोबा कयामत बक्से खुदा ऐसी नयामत हर रोज मुझ पे ही बरसे ।।
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नारी पर अत्याचार
तेजी से बदलते इस दुनिया मे, हमारा क्या कोई मान नहीं। प्रतिदिन होता हमारा अपमान, क्या हम कोई इंसान नहीं।। कभी डायन, कभी चुड़ैल कहकर, क�
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