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सुख के साथी सैकड़ों,करते रहते वाह। खाने पीने में रहे,अन्दर रखते डाह।। सुख के साथी सैकड़ों,जैसे हो दस्तूर। दुख में ही पहचान हो,दिखे नह read more >>
करते रहते वाह,सैकड़ों सुख के साथी। अन्दर रखते डाह,दांत रखते सम हाथी। दुख में दे जो साथ,वही सच्चे हमराही_ यही मनुज पहचान,बनो कभी न मनमाथ read more >>
मै हिसाब नहीं रखना । कभी अपनी, वादिल मस्ती यों का हर लम्हा तो मुझे जीना है । यहाँ शौकबदं गूमानी मे , फिक्र मुझे क्यों ? फिक्र तो � read more >>
जीवन में ठहराव, और कुछ करने का भाव इंसान को सफल ही नहीं ,महान बना देता है read more >>
*रसोई में भोजन बनाना छोड़ने का दुष्परिणाम* अमेरिका में क्या हुआ जब घर में खाना बनाना बंद हो गया ? 1980 के दशक के प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास् read more >>
एक बार एक ब्राह्मण एक गाँव से दुसरे गाँव जा रहा था गाँव के बीच में एक हवेली थी जिसे भुतेली हवेली कहा जाता था उस हवेली से जाने वाले हर व्य� read more >>
चिंता चिता समान है,सदा करे नुकसान। बस मस्ती में सब रहें,सुन्दर हो पहचान। जीवन पथ पर हम चलें,मिले खुशी बेरोक_ चिंतन अवश्य कीजिए,और बढ़ा� read more >>
अच्छाई की भावना, लाती सदा बहार। बनते दूजे के लिए, अनुपम दिव्य विचार।। अनुपम दिव्य विचार,ज्ञान की ज्योति जलाती। घर घर हो उजियार,दुखों � read more >>
चिंता से ही गुण घटे, और घटे रुप ज्ञान। चिंता करना व्यर्थ है, चिंता चिता समान।। चिंता चिता समान है,इससे बढ़े अज्ञान। चिंतन अवश्य कीजि� read more >>
दोपहर का समय था एक बूढा आदमी चिलचिलाती धूप में पैदल राहों पर निकल पड़ा था उसे देखने वाला कोई भी ना था उसके चेहरे पर एक भावनात्मक छवि अंक read more >>
ये मौसम खिलते बहारें यहां- सदियों से ये जिंदगी गुजर रहीं हैं ये रचयिता की है रचना- दया की ये देखो लहरें गुजर रहीं हैं -मोती read more >>
अब मन भाग रहा है संसार की, माया जाल से !जाने क्यों ? अब तक रहा !इस संसार की माया में! उम्र के आखिरी पड़ाव पर न! जाने क्यों ?मन विचलित सा ह� read more >>
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