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Mangal Partap Chauhan

दोस्ती शायरी-मंगल प्रताप चौहान

दोस्तों के हौसला-अफजाई से, हर बुलंदियों को भी कदमों में झुका लूं। ये दोस्त तेरी दोस्ती में तो, तेरे हर गमों को भी सर पे उठा लूं।। इस दुनिया के समस्त चराचर, एक दिन बिखरे पंचतत्व हो जाएंगे। बस कर्म, मां बाबूजी और मित्र हीं हैं ऐसे, जिनकी यादें अनंत अमरत्व हो जाएंगे।। हम यादाश्त …

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हिंदी के कुलदीपक भारतेंदु-मंगल प्रताप चौहान

गिरिधर गोपालदास की छत्रछाया में पले-बढ़े थे, अल्पायु में ही दीखलाया चतुर्दिशा का हर एक बिंदु। हिंदी, हिंदू ,हिंदुस्तान का उद्घोष किया, कहलाये आधुनिक हिंदी के पितामह भारतेंदु।। हिंदी भाषा की नींव रखी, रीतिकालीन गलियारों से। मातृभाषा की सेवा में लगे, तन-मन-धन हृदय विकारों से।। हिन्द के हिंदी कुलदीपक थे, निज भाषा के अनमोल उद्घोषक …

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एक पिता हीं……..सूर्यवंशी मंगल प्रताप चौहान

माना कि मां ममता की मूरत होती है, बेटियां भी लक्ष्मी की सूरत होती हैं, बेटे भी वंश के अंश कुल के गौरव होते हैं, वंश को अनंत तक ले वाले सौरभ होते हैं, लेकिन एक पिता मां का अरमान होता है, बेटे-बेटियों के लिए राम और रहमान होता है, एक पिता हीं घर का …

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अन्नदाता की औकात…..सूर्यवंशी मंगल प्रताप चौहान

यदि औकात पर आ गया अन्नदाता, तो त्राहि-त्राहि मच जाएगी। सत्ता की गोदी में लेटे लोगों, तुम्हारी भी बूढ़ी नानी याद आ जाएगी।। पंचतत्व की भी औकात नहीं है, कि इनका कुछ बिगाड़ सकें। सब मित्र बने हैं बैठे, इन्हें नवबात सिखा सकें।। ये दुनिया के पालनहार यदि, पांव मोड़कर बैठ जाएंगे, भूखे पेट मर …

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मानसून से मन्नत…..मंगल प्रताप चौहान

ये काले बादल भी, अब स्वांग रचने लगे हैं, ये मेघदूत की अविचल किरणें , अब राग रचने लगी हैं। मानो “मंगल” की कुटिया भी, सुशोभित हो रही इन बूंदों से, मेरे मन में भी सजनी के , अधूरे ख्वाब सजने लगी हैं।। मेरे मन की बगिया में भी , अब कुंजन होने लगी है, …

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हम जानकर भी अनजान हैं – मंगल प्रताप चौहान

आज देश का परिधान बदल रहा, बदल रही देश की काया है। हम जानकर भी अनजान हैं, सब समय समय की अद्भुत माया है।। देश की संस्कृति विलुप्त हो रही, विलुप्त हो रही मानवता की प्रेम सुधा। हम जानकर भी अनजान हैं, कंकड़ पत्थर की भी व्यथा कहे विसुधा।। ये समय हर परिपेक्ष्य से गुजर …

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प्रकृति विनाशक दुनिया……मंगल प्रताप चौहान

प्रकृति धरा का यदि नहीं किया पोषण, होता रहा यदि प्रर्यावरण का शोषण। तो सून वह दिन दूर नहीं होगा प्यारे, जब सम्पूर्ण कायनात के चराचरों का होगा कुपोषण।। अब तो बिन बादल बरसात भी होती, भयावह मनमानी चक्रवात भी होती। पल-पल महाप्रलय को इशारा कर रही, ये ब्रह्माण्ड विनाशक दुनिया चादर डाले सोती।। अब …

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अधूरा चांद, अधूरी यादें – मंगल प्रताप चौहान

मुझसे हुई आखिर क्या? बात है, तुझसे कभी ना हुई मुलाकात है। अब तो तेरा दीदार पाने को, ये जीवन जैसे वनवास है।। अधूरा चांद, अधूरी रातें, अधूरी यादें, अधूरी तेरी मेरी हर बात है। तुम मुझसे दूर हुई इस कदर, तुम समझी ना कभी मेरा जज़्बात है। तू सिर्फ मेरी है , मैं सिर्फ …

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ऐसी होती है मां…. मंगल प्रताप चौहान ‘‘गौरव”

जब कभी जीवन में कुछ, गतिरोधक सा बन जाता है। एक ज्योति जीवन में तब, प्रतिबिम्ब सा दिख जाता है।। ऐसी होती है मां, वह होती है मां….. बेटे का पक्ष लेने के लिए, वह अनेक उलझनों में पड़ जाती है। बेटी का पक्ष लेने के लिए, वह दुनिया से भी टकरा जाती है।। ऐसी …

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जघन्य अपराध – मंगल प्रताप चौहान

आखिर,क्या? हो गया इस देश में, हैवानियत बढ़ रहा संवेग में। जहां चिरहरण पर महाभारत होता, वहां जालिम छुपते अब सियासी भेष में।। कभी मां सीता के रक्षा खातिर, राम-लखन अड़ जाते। लंका को तहस-नहस कर प्रभु हनुमत, रावण से लड़ जाते।। कभी पद्मावती को न दिखलाने को, रतन सिंह अड़ जाते। अस्मिता के रक्षा …

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फिर भी न जाने क्यों..बेटियां – मंगल प्रताप चौहान

आज हवाई जहाज चलाने से लेकर, मेडल जीतकर लाने तक की काम, करती हैं बेटियां।२ फिर भी न जाने क्यों समाज की नजरों में, हमेशा चढ़ी रहती हैं बेटियां।।२ नभ में उड़ान भरना हो, या सीमा पर लड़ भीड़ना हो। हर काम में प्रतिपल निपुण रहतीं हैं बेटियां, फिर भी न जाने क्यों समाज की …

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आजादी के दीवाने, शहीद भगत सिंह – मंगल प्रताप चौहान

सन् उनतीस में वीरा की वीरता ने, गोरों के सदन में हलचल कमाल किया। असेम्बली में बम फेक लोकतंत्र के लिए, क्रांति की बिगुल बजा गजब मिशाल दिया।। जल गई क्रांति की ज्वाला पूरे देश में, सेना थर-थर कांपे आगोश में। मार सांडर्स लिया लाजपत बदला, नाच नचाया गोरों को अलग भेष में।। इंकलाब जिंदाबाद …

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