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बेटियों का संघर्ष- शोभा सृष्टि

सारे जमाने की चुनौतियाँ सामने है पर अपने विश्वास की ध्वजा मजबूती से थामे आसमान पर नजरे टिकाएँ पैरो की हर जंजीर तोड़ भारत की तकदीर लिखरही है बेटियां । कुरीतियो का अपार दलदल है हर कदम पर फिसलन है पर हाथ मे पतवार थामे किनारे पर पहुचने की उम्मीद लिए प्रगति की राह चल …

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मंजिल- शोभा सृष्टि

मंजिलें नहीं मिलती केवल सोचने भर से मंजिलों तो मिलती है अनगिनत प्रयास से । मंजिल पर छाई अभी बंधनों की छायाँ है मंजिल पर छाया अभी खौफनाक साया है। मंजिलें कभी नहीं रखती हिसाब बेवजह के कारणों का मंजिले तो कदम चूमती है बेखौफ खतरों के सिकंदरो का।   शोभा सृष्टि  राजस्थान

बेटी का जन्म-शोभा सृष्टि

करो स्वागत बेटी के जन्म का , बेटी ही है आधार जगत का बेटी के आने पर नही तुम घबराओ इसे तुम मजबूर नही मजबूत बनाओ बेटी भी तो सौभाग्य लेकर आती है, वह भी घर का मान बढ़ाती है जमाने के नाम से नही उसे डराओ, जमाना हमसे है हम जमाने से नही यह …

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गृहणी-शोभा सृष्टि

एक एेसी शक्सियत जिसने हर सदस्य का जीवन संवारा है हर शक्स इसके अमूल्य समर्पण से हारा है। जीवन का हर इम्तिहान पास किया लेकिनअभिमान की परछाई तक नही इसके जीवन में । चट्टान सी अटल है पर जीवन कितना सरल है हमारी कश्ती तो कब की डूब जाती अगर हर क्षण उसका साथ नहीं …

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सपनो की खातिर- शोभा सृष्टि

सपनों को पूरा करने की खातिर अपनों से बहुत दूर है बहुत वक्त बीत गया माँ के हाथों से बनी रोटी खाये हुए है बहुत वक्त से अपनों के संग वक्त बिताये हुए पर अपनी भावनाओं पर सपनों के लिए काबू किया है वे जानते हैं उनके सपनों के लिए बापू ने कर्ज लिया है …

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चिंता नहीं चिंतन की आवश्यकता-शोभा सृष्टि

आज डॉटर्स डे के खुशी भरे अवसर पर मैं सभी महिलाओं और बेटियों को बधाई देती हूँ।आज बेटियों ने सभी क्षेत्रों में अपनी काबिलियत और जज्बे से परचम लहरा दिया है वे न केवल घर की शान बल्कि देश की शान भी बढ़ा रही है।चाहे घर हो या राजनीति खेल हो अथवा सैन्य क्षेत्र सभी …

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हिंदी कल आज और कल-शोभा सृष्टि

जन्म से ही तुम साथ थी मेरे, जन्म के कुछ समय बाद ही मैंने तुम्हे पहचान लिया था। तुमने ही मेरे भावों को शब्दों में स्थान दिया था मेरी भावों कीअभिव्यक्ति तुम्हारे शब्दों से थी तुम्हारे बिना तो मैं असहाय और निशब्द थी अपनापन था तुम में इसलिए मैने तेरा हाथ पकड़ा था। तुम्हारी सहजता …

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कृष्ण अद्भुत हर किरदार-शोभा सृष्टि

बैठे हो तुम मन के मंदिर में भक्ति प्रेम की बांसुरी बजाते हुए तेरे प्रेम की बंसी ने ही मुझे अपना बना लिया हैे। अष्टमी को जन्म लेकर भी अपने गुण रूपी कलाओं से पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह मोह लेते हो। लगता है तेरे गुणों की किरणो ने ही मुझ में प्रकाश भर दिया …

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प्रकृति माँ की कहानी- शोभा सृष्टि

तरक्की की राह में जो हिस्सेदार बनी उसके प्रति गैर जिम्मेदार बनते है। जो समझती रही हमे हर पल अपना उसके संग गैरो सा बर्ताव करते है। बहुत समय से शान्त होकर सब कुछ नम आँखों से देख रही थी। संतान के दिये जख्मो को भारी मन से झेल रही थी। सोच रही थी जिसको …

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प्रेरणा-शोभा सृष्टि

1हर दिन नये अनुभव लाता है फिर कुछ नया सीखने में हमारा क्या जाता है। 2गमो की पोटली के भार ने हमे थका दिया है खुश है वे लोग जिन्होने हर पल का मजा लिया है। 3मेहनत के पसीने से निकलता जल है। जीवन की हर उलझन का होता हल है। विपरीत परिस्थितियो में धैर्य …

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रिश्ते की डोर-शोभा सृष्टि

यह केवल डोर नही धागा है मन्नत का यह साघारण डोरनही, प्रतीक है रिेश्ते की अटूटता का। गहरी भावनाएँ समाई है जिसमे, पवित्रता का अहसास कराती है सारी रस्मे। जावनभर निभाई जाती है सब कसमे। यह बंधन है जिसमे विश्वास की गहरी बुनियाद है बचपन की खट्टी मीठी याद है। दूर रहकर भी एक दूसरे …

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जीवन की किताब-शोभा सृष्टि

जीवन की इस किताब का हर अक्षर ऐसा हो सूर्य सी दिव्यता ,हि मालय सी विराटता का प्रतिबिम्ब नजर आए , जब हर किसी की नजर जाए। जीवन उस रब की दी अनमोल धरोहर है, संभाल लिया उसे प्यार से तो बन जाती खुशी का सरोबर है। माना कि सब कुछ अपने अनुकूल नही लेकिन …

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