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मोती लाल साहु
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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
@ --7
, Jharkhand
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ये मालिक की दुआ है
दया तू लुटा देना - कुदरत ने दिया है ये मालिक की दुआ है - प्रेम तो ग़म की दवा है !! - मोती
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मानव तू देना मानवता
मानव तू देना मानवता - गहना ये है मानव की तू है वह नगीना - हर मानव में जोड़ देना , यह कार्य कर देना दाता की !! - मोती
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पलकें जब उठीं
पलकें जब उठीं- रूह तक पहुंच रही थी नज़रों की रिमझिम- बारिशों में दिल भीग रहा था अब क्या हुआ कि- एकबारगी मौसम बदल गए जो हुआ मन तरंग मे
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विजय रथ
ज्योति स्वरूप - स्वयं प्रकाशित आत्म तत्व , को जीते जी जिसने जान लिया वहीं विजय रथ में सवार है ! -मोती
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रणवीर
जो अपने मन को पराजित कर चैतन्य, हो गया वहीं - रणवीर ! -मोती
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संसार सागर में....
लहरों से- खेल-खेल में गहराई, में गोता लगा रहा हूं खारे समुद्र में मीठी स्वाति का वह बूंद-ढूंढ रहा हूं दूर कहीं- उजला प्रकाश से, दमकता �
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सुनेंगे जमाने को जो सुनते हैं....
सुनेंगे, जमाने को जो सुनते हैं, सच- झूठ, झूठ- सच लगता है साकी को विवेक सखा जो है, मैं निभाता रहूंगा सुनने तक -मोती
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एहसास जो कुदरत का हो....
एहसास जो कुदरत का हो, तोहफा है सब कुछ- बेमिसाल झरता ये अमृत का झरना, घट में टपके- वाणी में सुवासित घुला हो जीवन का ये ज्योति- प्रज्वल�
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ये रिश्ते दिल के करीब थे कभी
ये रिश्ते- दिल के करीब थे कभी ? ये मंजर जो बदले- बदले मौसम बहार में गुदगुदाते दिल ये- मिजाज में अपनों की महक पास बैठो- जरा तसल्ली तो क�
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जगत के रंग ....
जगत के रंग- देख मन में उठते तरंग ख्वाबों की दुनिया- बुनते गुजर जाते उम्र तमाम हर राही यही कर्म- दोहराता फिरता इस जगत में सपने-सपनें �
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