कण- कण में हर जगह है,
जड़- चेतन में भी है।
यहां है वहां भी है,
दाएं है बाएं भी है।
ऊपर है नीचे भी है,
मेरे अंदर है,सबके अंदर है।
वह सत्य हरे� read more >>
मानव तन के दो रूप,
प्रथम देह का- अंत।
दूजा है प्राण- अनंत,
पल दो पल का साथ।।
मानव देह गुण अनेक,
स्वयं का ज्ञान मूल।
अंत से अविनाशी तक,
वि� read more >>