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मोती लाल साहु

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My Articles

अजी हम भी कवि हैं ! आप मानो ना मानो- कब तक चुप रहेंगे, साज छिड़ गए हैं तो- कान के पर्दे से टकराएंगे ही। अजी हम भी कवि हैं ! -मोती read more >>
ये दरिया कल-कल बहती! बादलों से झरते, रिमझिम फुहारें। दिल के साज छेड़ती, ये दरिया कल-कल बहती।। ये मौसम बहारों का, और ये फिजाएं। पहाड़ो read more >>
सपनों की लाली ! आंखें चार हुई थी, मुलाकात खूब हुई थी- जो जुबान से कह ना पाए, सोचा था- एक लाल गुलाब दूंगा लाल बाग से चुन लाऊंगा, भेंट करूं read more >>
पीयू-पीयू बोले दिल ये पपीहा नदिया के तीरे बंसी जो बोले, पीयू-पीयू दिल ये पुकारे आओ सखी- हम देखन को चलें, बंसी बजैया मोरे पिया- कृष्ण म� read more >>
सखी रे चल रे चल ! कोयलिया- गाती तो होगी, फाग सुनाती तो होगी। फागुन की- मस्त बयारों में बहकते गाते, सखी रे चल रे चल। नदिया के पार- आम की � read more >>
राहगीर मैं आया हूं, सुर साथ लाया हूं हवा छेड़ेगी हर साज, मौसमें बहार गाऊंगा बसंती बयार में फागुन के राग -मोती read more >>
ऋतुराज- जो आए हैं, बारह मास के बाद। बहकती- चली बसंती बयार, ओढ़ के पीली चुनरिया।। खिल रहें- ये सरसों के फूल, खुशबू बिखेरने लगीं हैं। ख read more >>
दुआ है- हे पीहर की तू है राजदुलारी! तुम्हारी यादों का- यह मेला रह-रह के गुजरता है! हंसी और रूठने- मनाने का हर सिल-सिला! तुम ही तो थी घर- � read more >>
हे अद्भुत- संसार के रचना करने वाले,, ...तुम हो- कलाकारों के कलाकार, अद्भुत और संचालन करता,, ...हे प्रकृति तुम्हें लोग कहते हैं महाभ� read more >>
महक गया- ये चमन तेरे आने से! स्पर्श मिला तुम्हारा- खिल गई हर कलियां! भंवरें की गुनगुनाहट में- हवा खेल रही है अटकेलियां! महक गया- ये चम� read more >>
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