#कोयलांचल
वह भी क्या दिन थे जब भूगर्भ में जाते थे...
जब हाथों में लाठी, पैरों में भारी जूते होते थे,
सर पर हेलमेट, कमर में टॉर्च की बैटरी ब� read more >>
कभी पीछे मुड़कर देखता हूँ तो लगता है,
कुछ तो अधूरा रह गया इस सफर में...
जो अनुभव मिला,
जो सीख मिली,
जो अवसर मिले -
शायद उनका पूरा योगदान इस � read more >>