Kishor Kumar Bhardwaj 04 Nov 2025 कविताएँ अन्य रास्तों के कांटे 18871 0 Hindi :: हिंदी
“रास्तों के कांटे” रस्तों में कांटे बिखरे हों, तब भी पैर बढ़ाना है, लेकिन कांटे ही बिखरे हों - तो बेहतर हट जाना है। इतना भी क्या आशावादी होना कि होगा ही सब, कभी-कभी कुछ ना होने का भी मतलब हो जाना है। हर जंग जीतनी ज़रूरी नहीं, कुछ हारें सिखा जाती हैं, हर चाह पूरी नहीं होती, कुछ कमी राह दिखा जाती हैं। हर गिरना भी एक सबक है, हर रुकना भी एक ठहराव, कभी मंज़िल नहीं मिलती - पर मिल जाता है अनुभव का गाँव। ज़िंदगी सिर्फ़ मंज़िल नहीं, सफ़र को भी समझना है, कभी धूप में जलना सही, तो कभी छाँव में ठहरना है। जहाँ रुक जाना ठीक लगे, वहीं ठहर जाना है, क्योंकि हर मोड़ पर मंज़िल नहीं - कहीं सुकून का ठिकाना है। सपनों के पीछे भागो ज़रूर, पर नींद न खो देना, अपने ही बनाए सवालों में खुद को न खो देना। कभी हार कर भी मुस्कुरा दो, तो जीत बन जाती है, कभी टूट कर भी सँभल जाओ, तो प्रीत बन जाती है। जो बीत गया उसे बीतने दो, जो रुक गया उसे रुकने दो, हर आँसू का मोल नहीं, कुछ मोती यूँ ही झुकने दो। कभी ख़ामोशी भी बोलती है, बस सुनने की चाह चाहिए, हर अंधेरे में उजाला नहीं, पर उम्मीद की राह चाहिए। तो चलो वहीं तक चलें जहाँ तक दिल साथ निभाए, जहाँ सच्चाई न थक जाए, जहाँ मन सुकून पाए। ज़िंदगी कोई दौड़ नहीं - ये ठहरावों की कहानी है, जहाँ गिरकर भी मुस्कुराना, असल में वही रवानी है।