समझदार बहुत थी ।
अपनी मुश्किलों से वास्ता निकाल गई ।।
लेती रही, जिंदगी इम्तिहान पे इम्तिहान
पर ,वो आखिर
,हारी नहीं .......
अपनी मंजिल का र� read more >>
तारीखें तय कर , इम्तिहान अभी......और ....बेजार होंगे....!
मुश्किल में है ।
मुकद्दर के सिकन्दर का अब हर ख्वाब ...
अपने फैसले पर ज़रा ग़ौर कर.....! read more >>
दौलत ही दौलत बिखरी है ।
रास्तों पे,
खूबसूरत एक निर्माण और होगा
चाहत की वसीयत पे . क्या लिखु......?
अपनी मुहोबत की सुंदरता
जानती हो तुम.. ....... read more >>
हाथ की लकीरों में खज़ाने होते ।
तों मुकद्दर की क्या बिसात थी ।।
हर कोई शहंशाह होता !!
दुनियां में मेहनत पे .......
यकीन करने वालों की क्या औ� read more >>