लो फिर उठा दी मैंने कलम लो फिर उठा ली मैंने कलम। जैसे घर के होते काम अनेक नहीं मन करता कि उठाऊं मैं कलम। ‌‌‌‌ लेकिन हो रहा जब जुर read more >>
चुनाव आ गया
निगाहे प्यार के रंग में सराबोर है |
कोई गरीब न हो जमाने से मारा संग खड़े बड़जोर है||
जागते में देखा है मैंने, स्वप्न सी एक दुनि� read more >>
*मोहन बेटा ! मैं तुम्हारे काका के घर जा रहा हूँ।*
*क्यों पिताजी ?*
*और आप आजकल काका के घर बहुत जा रहे हो ...? तुम्हारा मन मान रहा हो तो चले जाओ read more >>
बेटी होती है लक्ष्मी का रुप उसका अनादर ना करो, दहेज के कारण उसका जीवन अभिशाप ना करो,
डरते हैं गरीब लोग बेटी के जन्म से, खुशी नहीं दुख मना� read more >>