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आज के समय में गरीबी और अमीर कि खाई इतनी बढ़ चुकी है। कि गरीब और गरीब होता जा रहा है। और अमीर और अमीर होता जा रहा है। गरीबी का अर्थ है। कि स� read more >>
आलेख- राहुल गांधी के नाम पाती! लेखक- जितेंन्द शर्मा तिथी-24/03/23 प्रिय राहुल गांधी! आपका वक्तव्य " मैं सावरकर नहीं, गांधी हूं!" सुना। &qu read more >>
चलते-चलते- गुज़र गए कितने ही युग इस जहां को ये- अनवरत संपन्न हो रही है यह प्रकृति- अपने कार्य में मुस्तैद सटीक- बिल्कुल ठिकाने से, � read more >>
कभी चलते नहीं देखा! सांसों की- हवा में मिट्टी, को रोते हंसते देखा चार कंधों- के बोझा को, मिट्टी में मिलते देखा इस- कायनात को, अनवरत च� read more >>
पृथ्वी की अक्षांश वह देशांतर रेखाओं में अंतर क्यों ?अक्षांश के बीच की दूरी हर जगह एक ही समान रहती है ऐसा क्यों? फिर तो देशांतर रेखाओं मे read more >>
आज के समय में गरीबी और अमीर कि खाई इतनी बढ़ चुकी है। कि गरीब और गरीब होता जा रहा है। और अमीर और अमीर होता जा रहा है। गरीबी का अर्थ है। कि स� read more >>
जाग जाती है- करुणा हमारे में, जोड़ते हाथ को हम हाथ जोड़ते हैं रहते इंसान यहां- बस्ता संसार यहां, ये सभ्यता है हमारी और नहीं कहीं ठौर read more >>
यह संसार एक पेड़ है- काम, क्रोध, मोह, लोभ, के फल लगे हैं करुणा मूल है जो आपके- अंदर है बीज के रूप में अर्थात यह संसार आपके, अंदर से प्रस् read more >>
चाहे कितना भी अंधेरा है, सूरज है और वह आएगा -मोती read more >>
आपको - परमात्मा की जरूरत है अपने अंदर की - करुणा की ओर देखिए उसे स्पर्श कीजिए - परमात्मा का मंदिर तो आप हैं -मोती read more >>
मां का स्थान आज भी वही है क्योंकि मां की जगह न कोई ले पाया है और न ही कोई ले पाएगा ।बस हालात और वक़्त बदलते हैं इसलिए उनका भी स्थान बदलता � read more >>
पलक झपकते- क्या सवारी तुम्हारी, कौन सा क्या परमिशन कहीं भी पहुंच तुम्हारी राज तुम्हारा- मन-बुद्धि-अहंकार, करते हैं सलाम तुम्हें च� read more >>
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