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सचेतन को वक्त है अनमोल....
सचेतन को वक्त है अनमोल.... वक्त की दऱक में पड़ा था वह हीरा गुज़र गए हम दस्तक देंगे लौट के वक्त जो गुज़र गए हैं -मोती
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अथाह प्रेम की महक....
अथाह प्रेम की महक.... तुम्हारी सुकून भरे चेहरे से निकलती आभा मेरे अंदर की संगीत को झंकृत करती है यही तो अथाह प्रेम की महक है जो मुझम
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प्रेरणा....
ये खूबसूरत पल के लिए- कुछ बदसूरत पल, लाजमी हो सकता है क्योंकि बिना कांटे के- गुलाब कहां मिलते जनाब आख़िर- कीचड़ में ही कमल खिलते हैं
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होली
होली के दिन आई रंग बिरंगी खुशियां लाई साहित्य लाइव के मंच को मेरा हार्दिक शुभकामनाएं होली की । Happy Holi धन्यवाद
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बहार
सरदियांं खत्म होते ही बहार बसंत रतु आ जाती है। हमारे देश में फेबृवरी मार्च में बहार आती हैं। सुबह में चिड़ियों
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तेरा अनुराग...
तेरा अनुराग.... हे अतुल हे अनुप ! जगत में - सृष्टि का ताज है मानव तन में- समा रहे हो, जीवन के बीज हो तुम ये जीवन - जो खिल रहे हैं , तुम ही प्
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मैं उस तत्व का अंश हूं....
मैं उस तत्व का अंश हूं जो पृथ्वी,जल,अग्नि, वायु और आकाश का गति है समस्त ब्रह्मांड- का सृजनात्मक स्रोत, मेरे अंदर से विकसित होकर मेरे �
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संपूर्ण ब्रह्मांड का स्रोत....
निज स्वरूप- में स्पर्श है सांसों का, जो स्रोत है जीवन का। ये अनुराग है- ईश्वर का या संपूर्ण, ब्रह्मांड का स्रोत मौजूद है -मोती
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तत्व ज्ञान के बिना शून्य....
संपूर्ण जीवन की- सार्थकता समस्त कर्म, तत्व ज्ञान के बिना शून्य समस्त कर्म- तत्व ज्ञान के बिना शुन्य! -मोती
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श्रेष्ठतम मानवीय गुण....
श्रेष्ठतम मानवीय गुण- स्वयं का रूप को तत्व ज्ञानी, समय के महापुरुष से जानना श्रेष्ठतम मानवीय गुण! -मोती
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चालू हे सखी होरी में....
चालू हे सखी होरी में! चालू हे सखी रंग गुलाल ले आओ री। देवरी में आंगना में रंगोली सजाओ री।। कौन बजावे ताशा हम बजावे ढोलकिया। चालू हे स�
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ओस के ये मोती तपती किरण में उड़ रही है....
ओस के ये मोती- तपती किरण में उड़ रही है! मन को लुभा रही है, माया की ये छाया उड़ रही है दृश्य जग-जन- भंवर जाल में उलझ रही है काया में- आती
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