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पहली बार जब तुझसे नज़रें मिलीं, साँसों में जैसे खुशबू घुली। अब तो बस तेरा नाम लूँ हर घड़ी, तू ही तो मेरी ज़िंदगी, तू ही दिलरुबा चली। read more >>
नज़र को राह मिली पर सफ़र मिला ही नहीं, बिना उस नूर के दिल का हुनर मिला ही नहीं। ​पढ़ा किताब-ए-हयात को, हर एक पन्ना खुला, मगर जो भेद था उसम� read more >>
करूँ मैं ज़िक्र उसी का, करूँ मैं फ़िक्र उसी का, मेरी हर साँस में शामिल है असर सिर्फ़ उसी का। उसी के नाम से रौशन है दिल की हर इक गली, ज़मीं की � read more >>
जोश-ए-परवाज़ हो तो आसमाँ भी छोटा है, कोई चोटी नहीं अरमानों से ऊँचा शिखर। वो तलाश-ए-सुकूँ जो दिल में ठहरी है अब, नहीं सागर से गहरा, है मोह� read more >>
हर शय में वो नूर, वो एक ही चेहरा, पर आदमी ने कहाँ इत्तेहाद देखा रे। मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे की क्या बात, हर दिल की धड़कन में मैं� read more >>
भूल मेरी कि मैं यहांँ रहूंँगा बरकरार, ना कोई जीव और जगत रहेगी बरकरार। गुरुर-ए-दौलत-ओ-हिकमत किस पे कीजे, नज़र है वक्त की, सब कुछ रहेगा ना� read more >>
ज़मीं ये आसमाँ का हर नज़ारा उसी से, जो गुमसुम हों, मिला हर सहारा उसी से। ​कोई सहरा में भटके तो, मंज़िल बता दे, जो हर मुश्किल में रहे, वो क� read more >>
तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का, गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है? ​तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल, नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है? read more >>
ज़िंदगी को मिल गई है अब, सद्गुरु के दरबार में, पा लिया है रूह ने पनाह, अब इस ज़िंदगी के सफ़र में। ​नज़र जब से मिली है तुझसे, मन की हर उल� read more >>
इस जग से न्यारा है ठाकुर मेरा, प्यार सबका दुलारा है ठाकुर मेरा। ​हर ग़म का अब इक ही सहारा है, हर दिल का किनारा है ठाकुर मेरा। ​हर दश्त � read more >>
हर पल उड़ते ख़्वाबों के परिंदे, अनंत है अंबर, कोई ठिकाना नहीं। न जाने कौन सी मंज़िल पे रुकना है, ये फ़ैसला तो, अपने हक़ में नहीं। ​ज़ि read more >>
वो जन्नत वहां है, दरबार मेरे मुर्शिद का, वो शांति वहां है, ज्ञान मेरे मुर्शिद का। जहां मेरे मुर्शिद का है बसेरा, वहीं बरकरार-ए-कायना� read more >>
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