मतला:
कभी-कभी ख़ामोशी भी बयान बन जाती है,
हर अनकही सी बात पहचान बन जाती है।
लबों पे जो न आए, वो नज़र कह जाती है,
चुप्पी भी दर्द की ज़ुबान � read more >>
करम हर क़दम पर, है तेरी ये नज़र,
ऐ मुसाफ़िर ज़रा, अब तू संभल कर।
काट कर ये कोटी जन्म दिए,
मानव तन दिया है, तू संभल कर।
संभल के चल तू , ये मा� read more >>
दया तू लुटा देना, कुदरत ने दिया है,
जो बांटो ख़ुशी को, वो बढ़ता गया है।
ये मालिक की दुआ है, हर जर्रे में शामिल,
जो देखा उसे दिल से, वो हर सू read more >>
खामोशी में भी जो गुढ़ बात कह जाए,
वो अश्क आंँखों से मोती बन बह जाए।
रिश्तों की डोरें, सांँसों की एक सरगम,
इक पल में ही सब कुछ कितना सह जा� read more >>
1. फना के बाद
मेरा आग़ाज़ ही मुकम्मल तब होगा,
जब मेरे जिस्म से मेरी रूह फ़ना होगी...
ना पूछ मेरी तन्हाई का सिला क्या होगा,
ना सोच कि बाद-ए-� read more >>
*दिल की बातें*
तुम मतलब की तेजी हो,
मै तुरंत का रिप्लाई प्रिये...।
तुम गांव की ग्रेजुएट लगती हो,
मैं गाँव का फ्री मेंस प्रिये ...।
तुम शहर � read more >>