नज़र को राह मिली पर सफ़र मिला ही नहीं,
बिना उस नूर के दिल का हुनर मिला ही नहीं।
पढ़ा किताब-ए-हयात को, हर एक पन्ना खुला,
मगर जो भेद था उसम� read more >>
करूँ मैं ज़िक्र उसी का, करूँ मैं फ़िक्र उसी का,
मेरी हर साँस में शामिल है असर सिर्फ़ उसी का।
उसी के नाम से रौशन है दिल की हर इक गली,
ज़मीं की � read more >>
जोश-ए-परवाज़ हो तो आसमाँ भी छोटा है,
कोई चोटी नहीं अरमानों से ऊँचा शिखर।
वो तलाश-ए-सुकूँ जो दिल में ठहरी है अब,
नहीं सागर से गहरा, है मोह� read more >>
हर शय में वो नूर, वो एक ही चेहरा,
पर आदमी ने कहाँ इत्तेहाद देखा रे।
मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारे की क्या बात,
हर दिल की धड़कन में मैं� read more >>
ज़मीं ये आसमाँ का हर नज़ारा उसी से,
जो गुमसुम हों, मिला हर सहारा उसी से।
कोई सहरा में भटके तो, मंज़िल बता दे,
जो हर मुश्किल में रहे, वो क� read more >>
तुम्हें देख कर खिला है मेरे दिल का,
गुलों सा रंग चेहरे पे है, ये क्या है?
तुम ख़ुद ही हो एक पूरी ग़ज़ल,
नज़्म-ओ-सहर तुम्हारी, ये क्या है?
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तेरी दर्द भरी आहे,
कानों से कैसे जारी करें।
तेरी दर्द भरी आहे,
कानों से कैसे जारी करें।
जो तेरी रूह को.. छू कर,
आई हवा मेरे पथ से वो,
अपन� read more >>