कम हो गया है मरतबा इश्क़ का आज ,
जिस पर खुदा को था बहुत ज्यादा नाज़ ।
गर रहता मोईन, इश्क ए जुनून उधर अब भी सवार,
तो यूं ही ख़त्म न होजाती दुनिय� read more >>
यहां था कोहरा घना, मैं था अंधेरों से सना। तेरी जो धूप परी मुझ पे, मैं भी उजालों से बना। तेरी किरणों के फुहारों में, मन रोशनी से भींग गया। � read more >>