अरे तुम ना आए यह सही!
तुम नहीं अपनी यादों को क्यों? भेज दिया मुझे तड़पाने के लिए?
सोचती हूं उस दिन को जब हम तुमसे मिले !और उस पल को जब हम तु read more >>
जिंदगी के इस सफर में बहुत कुछ पीछे छूट गया!
बनाए हमने कई रिश्ते पर कई रिश्ते हमसे रूठ गए !
मैं कैसे उनको समझाऊं इस
जीवन रूपी माला में !
ब� read more >>
दिल में उठते हजारों विचारों को एक रूप दूं !उस रूप को मैं फिर से एक सुंदर सा श्रृंगार करूं !
पर सिंगार करने के लिए कौन सा रंग इस जहां से ढूं read more >>
(मुक्तक छंद)
सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम।
सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम।
गम को हम तूं मार दें,हरदम रखें जुगार_
जन्म मरण � read more >>
(मुक्तक छंद)
प्रभुता के संदेश से, लोगों में है हर्ष।
आपस में सब बात कर, भूल गए हैं कर्ष।
जज्बा सब ही पूर्ण हों,चाहे हों जो राह_
बच्चा बच्च read more >>