(दोहा छंद)
समय समय का फेर था, गए वनवास राम।
रावण का वध थे किए,अमर हुआ तब नाम।।
समय समय का फेर था, सत्य गया था हार।
भरी सभा में द्रौपदी, करी read more >>
बेटी
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बेटी तु जो समजे पाप
तो यह तेरे नजरो का दोष भाया
बेटी है एक कोहनुर हिरा
प्रेम का अपुर्व सागर गहरा
बेटी तु जो समजे पाप.....।।धृ।।
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कुछ तो काला दाल में, सूरत पर है हर्ष।
बात करें वह गर्व में, फिर भी हो उत्कर्ष।।
कुछ तो काला दाल में,मिलता मुझ से रोज।
करता बातें खूब ही, � read more >>