हर कदम पे जिंदगी, रुलाती है मुझे।
ज़ख्म दे दे कर भी ये, बुलाती है मुझे।
शौक नहीं है पीने का, कुछ भी अब मुझे।
ग़म की प्याली फिर भी ये,पिलात� read more >>
कदमों मेरे छालै
"जख्म दिल" के नहीं
दिखाने वाले
ये "दर्द "मेरा मुकद्दर.......तु क्या..........?
नाम तेरा.... मेरे लब्जो मे... रहे ....
ये.....
नाम..... read more >>
दुनियाँ ये चाहे,
जाने न जाने
हम को तेरी दीवानगी से
अब नहीं उभरना है !
.........
नशा तेरी मुहब्बत का ही करना है !
.........
रहके तेरा दिवाने ,
ह� read more >>