बहर:_2122,2122,2122,212
मैं चला हूं अब, सजाने फूल से तसवीर को।
बदल लूंगा श्रम, कड़ा कर नीच सी तक़दीर को।
तुम नगीना हो, खजाने की सजा दी हो मुझे_
खत्म � read more >>
किसी ने किसी के सपनों, का इन्तकाल ही कर दिया है,
बेरहम मासूम जज़्बे, को कुचल कर राख कर दिया है,
क्या मजाल कि जनाब एक, भी अल्फाज़ से आगे आते_ read more >>
सबके दाता राम हैं, हृदय बसा लें राम।
सब प्रभु ही सम्हाल दें, करें सरल हर काम।
गम को हम तूं मार दें,हरदम रखें जुगार_
जन्म मरण से मुक्त कर,द� read more >>
गीत- आ कहीं ओर चलें।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
कोई तुझको ना चुरा ले, आ कहीं ओर चले।
कोई वापस ना बुला ले, आ कही ओर चले।
चांद तारों से परे भी, त� read more >>