बचपन की पढ़ाई
कितने याद आते हैं वह बीते हुए दिन नादान थे समझ नहीं था मासूम थे किसी के लिए जलन भावना नहीं था बस खुशियां बहुत थी गम कुछ भी � read more >>
"घर का सम्मान.....
चालीस पार मोहन ने आखिर अपने आँफिस की सहकर्मी सुधा से शादी कर ही ली....सुधा जहां एक अनाथ लडकी थी अपने चाचा चाची के पास पली ब� read more >>
अटूट विश्वास
*रात के ढाई बजे थे, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी । वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था। पर चैन नहीं पड़ रहा था । आखिर थक कर read more >>
एहसास रिश्तों का
पिता बेटी के सर पर, हाथ रख कर बोला :-
"मैं तेरे लिए ऐसा पति खोजकर लाऊंगा,
जो तुझे बहुत सारा प्यार करे,
तेरी भावनाओं का स� read more >>
हीरे की परख
एक कुम्हार को मिट्टी खोदते हुए अचानक एक हीरा मिल गया, उसने उसे अपने गधे के गले में बांध दिया...
एक दिन एक बनिए की नजर गधे के ग� read more >>