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#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" खुशी पर्व नवरात्रि की,पावन आया वक्त। माता के नौ रूप से,लहर चले है रक्त।। प्रथम शैल पुत्री � read more >>
मैं लौटा अपने गांव में जब नहीं मिला मुझे देखने को कोई भी खेत -खलिहान भैया - भाभी , चाचा -चाची सब बन गए थे नया दुकानदार बाग-बगीचा , पार्क ब� read more >>
पितृ पक्ष पितरों की उपासना है जो सभी पूर्वजों के लिए किया जाता है, पूर्वजों और उनके पितरों के आशीर्वाद और दुआओं से भरती हमारी झोली है। read more >>
तू आएगा यही आस रहती है मुझको तेरे आने के बाद जाने का दर्द ज्यादा सताती है मुझको क्यों तू मेरे नसीब में नहीं किसी और के हाथों की लकीर ह� read more >>
दिल देकर तुझको हमने एक रोग ले लिया पहले तो जीते थें अब,दिन - रात का रोना हो गया फसाना क्या सुनाए अपनी जिंदगी का जिस्म तो यहां है रूह तो read more >>
धड़कन को एक सहारा मिल गया, उसकी एक नज़र पे मैं मर गया। जहां तन्हाई थी वहां कली आ गई, फिर मन का मौसम गमकीला हो गया। दिल में मोहब्बत ही मो� read more >>
पता है हमें इतनी आसान नहीं है हमारी राहें पर क्या करूं चलना ही है ख्वाब ही ऊंची देखी है ये निगाहें तो मुश्किलों से भी मुस्कुरा के च� read more >>
आवाजें ही तो मेरी पहचान है बसा इसमें मेरा स्वाभिमान है फिर क्यों ख़ामोश हो जाऊं आवाजें ही तो मेरी मुकाम है क्यों सुन कर भी अनसुनी कर read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रोने से क्या फायदा,आगे का यूं सोच। रहो दूर तकलीफ से, जीवन में हो लोच।। रोने से क्या फायदा,ग� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" लीपा_पोती चल रही,माता के जो भक्त। चमक रहे घर द्वार अब,बना रहूं हम सख्त।। लीपा_पोती चल रही,द� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक जरा सी भूल से,भारी हो नुकसान। और व्यर्थ चिन्ता रहे,जाते घट है मान।। एक जरा सी भूल ने,ले ल� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काला है कुछ दाल में,बाहर से है रंग। लौटे जो बेरंग हो,देख सभी हो दंग।। काला है कुछ दाल में,आँ� read more >>
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