संदीप कुमार सिंह 01 Nov 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 33578 0 Hindi :: हिंदी
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आया करवा चौथ है,लाया खुशी हजार। पत्नी ने पति के लिए,करी भव्य श्रृंगार।। आज करेगी चाँद का,प्रिया नव्य दीदार। फिर वह अपने चाँद से,खूब करे इजहार।। मेंहदी के मधु रंग में,बनी कामनी खास। कजरारी नैना लिए,पूर्ण अटल विश्वास।। सजी कलाई आज है,कंगन की है आब। खनक रहा मन आस से,पूर्ण करे महताब।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....