वो सफ़र मे एक चाँद जैसा है 2
दूर तो है लेकिन दिखता रहता है ll
बदहवास नजरे मेरी उसको देखती हैं
काश वो मेरे रुबरु होता,
और उसी से मैं लिपटा � read more >>
धूप की रंगत तो देखो...........
ऐसा लगता है और चढ़ेगी
तिलिस्मि काम है इसका
इंसान सुखा होगा तो भिगा देगी.....
बीती शाम तो चली गयी
नहीं पकड़ पाया read more >>
मैं कहूँ एक ख्वाब वो
सोचूँ उसे हर रात मे l
उससे नज़र की गुप्तगु
होती नहीं अल्फ़ाज़ से ll
ठहरे हो जो मेरे होंठ पर
शब्दों का है इक गान वो...
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