Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
*वो छोटा सा मेरा गाँव-2* वो छोटा सा मेरा गाँव, जहाँ भोर हमें जगाती थी, चिड़ियों की मीठी आवाज़ मन को रोज़ सहलाती थी। कच्ची पगडंडियों पर � read more >>
ज़िंदगी तब तक हल्की सी लगती है, जब तक हर बोझ माँ-बाप उठाते हैं। हम धूप में भी सुकून ढूँढ लेते हैं, क्योंकि वो अपने हिस्से की छाँव गंवाते read more >>
किस्मत कोई ताज नहीं जो बैठे-बैठे मिल जाए, ये तो वो जंग है जो सिर्फ़ लड़ने से ही जीती जाए। ख़यालों की उड़ान बहुतों ने भरी है, पर मंज़िल उस read more >>
कितनी भी योजनाएँ बना लो तुम, नक़्शे, रास्ते, मंज़िल के सपने— आख़िरी मोहर समय ही लगाता है, बाक़ी सब तो इंसान के अपने-अपने भ्रम हैं। हम स� read more >>
परिवर्तन प्रकृति का अटल नियम है, यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं—न लोग, न हालात। जो पीछे छूट गया, वो कहानी बन चुका, अब उसकी राख कुरेदना खुद को जल read more >>
तलवार से तीव्र, क़लम की धार। सह्य करवाल की, असह्य क़लम की मार। अंत में क़लम के, नीचे आती तलवार। क़लम की मार से, क़लम ही सकती उभार। क� read more >>
जीवन से बड़ा कोई विद्यालय नहीं, ये सिखाता दर्द भी, हिम्मत भी, ताल भी। हर सुबह नई लड़ाई, हर रात नया सबक, जो भागेगा इससे—वो रह जाएगा फँसकर। read more >>
अनुमान तो बस दिमाग की एक चाल है, आज सही—कल पूरी तरह बेहाल है। पर अनुभव… वो आग है, जिसमें जलकर इंसान स्टील बनता है। अनुमान बहकाता है, क� read more >>
हमेशा सोच जीत की रखो, हर मंज़िल का दरवाज़ा खुलता है; जो रातों में जलता रहता है, सुबह वही सूरज बनकर मिलता है। कदमों में दम, दिल में ज़ोर, read more >>
हाथों में छाले, उदर में भूख ; नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख, मजदूरी किसी का शौक है क्या? घर का राशन, बच्चों की शिक्षा; प read more >>
हाथों में छाले, उदर में भूख ; नेत्रों में निद्रा, नीर को आतुर कंठ चुका है सूख, मजदूरी किसी का शौक है क्या? घर का राशन, बच्चों की शिक्षा; प read more >>
त्याग तो करना होगा, नींद का या फिर सपनों का— जो आराम से समझौता कर बैठा, वो मंज़िल से हाथ धो बैठा। यह दुनिया तकिए नहीं देती, यहाँ बिस्तर read more >>
Join Us: