आज का युग अजीब सवाल पूछता है,
बेटा कहता है — “आपने मेरे लिए क्या किया?”
और माँ-बाप चुप हो जाते हैं,
क्योंकि उनका उत्तर शब्दों में नहीं,
ब� read more >>
" जुगनुओं ने शराब पी ली है.."
(✍️तीखा व्यंग्य - के. भारद्वाज)
जुगनुओं ने शराब पी ली है,
अब ये सूरज को गाली देंगे,
दो घूंट सत्ता की, तीन झूठ ता read more >>
"✍️निर्णय और समय - के.भारद्वाज"
कल जो निर्णय था -
वह तब सही था,
भले ही आज
उसके मायने बदल गए हों।
आज जो ठाना है मन ने,
वह अब सही है,
भविष्य म� read more >>
एक दिन ओर जन्म -दिन....
सबकी विकल्प सोच में
बदलने का एक खाश दिन।
नियम तो नहीं,
पर नयापन लाने की कोशिश भी।
एक दिन ओर जन्म -दिन....
पर इसके वास� read more >>
आज के युग का अजब नज़ारा,
सबको मंज़िल चाहिए दोपहरा।
ना ठहराव, ना कोई सब्र अब,
हर दिल में बस जल्दी का सहरा।
कदम-कदम पर जो ठोकर खाए,
वो हार � read more >>