मेरे निज चार आखर प्रेम के - मात पिता🤗
मात पिता के प्रेम की, बात पृथक ही होय,
मात पिता के चरण जहां, शरण वही निज होय ।
ईश्वर भी निज मात पिता read more >>
कविता - ( दुख )
सुख में न जीना आया !
दुख ने सिखाया जीना !!
दुख भला हो तेरा !
जो पत्थर बन गया हीरा !!
सुख में न जीना आया !
दुख ने सिखाया जीना !!
स� read more >>
संसार में समस्त-
कर्म की पूर्ति के पांच कारण...
जब मानव,
दिव्य भाव प्राप्त कर लेता है...
तब वह पूर्णता को-
अनुभव करने लगता है,
वह जानने य� read more >>
धरती-
में हवा का चलना,,
संसार का-
स्वंय में गतिशील होना,,
इस शरीर में एक-
एक श्वांस का आना-जान,,
क्या यह ही-
वह शक्ति है जिसे लोग,,
भगवान- read more >>
तुम मिलो या न मिलो, मुझे गम नहीं
पर यह सत्य है, तुम हीर से कम नहीं।
कब तक रोक पाओगी,
मेरा प्यार तेरे लिए ही है।
तुम नहीं जानती मेरी चाहत � read more >>
कुछ इस कदर जख्मों का सिलसिला शुरू हुआ है,
एक के बाद एक नए रूप में दस्तक दे रहा है।
सारे सपने रेत की महल की तरह बिखर गए,
दिल में एक आह सी कस� read more >>
जीवन के संघर्ष में थक कर कभी ना हार...
जीवन के संघर्ष में थक कर कभी ना हार...
घिस घिस कर पत्थर से बनती लोहे की धार...
घिस घिस कर पत्थर से बनती read more >>
नई सुबह
सुबह हुई है उजालों ने फिर दस्तक दी है...
अंधकार मिटा है उम्मीदों ने साँस ली है...
सूर्यास्त हुआ है और भीनी धूप खिली है...
मद्धम हवा read more >>