जिंदगी के इस मोड़ पर न जाने
क्यों ?
अब अकेले ही अच्छा लगता है! बहुत कुछ किया औरों के हिसाब से !
अब अपने हिसाब से जीना
मुझे अच्छा लगता है !
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ए दिल तुझे घबराने की जरूरत नहीं तेरी धड़कन अब राम है, तू शून्य था तू शून्य ही रह जाता अगर राम के चरणों में खुद को समर्पित ना करता . Kirti singh read more >>
'सुधा' का साथ पाने की चाहत में
कई बार
न 'सुधा' मिलती है, न 'पम्मी' !
लेकिन
'पम्मी' के साथ से
कहीं अधिक पवित्र है
'सुधा' के लिए
हृदय की तड़प
ज� read more >>