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कविताएँ
मां ममता परिभाषा बदल गई
पिघल ममता मोम, रम स्वामिभक्ति रगों में घुल गई। निज सुत शोणित से, मां ममता परिभाषा बदल गई। चुटकी भर सैनिक, फ़रेबी फ़ौज से भिड़ गए। यहां
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बचपन की उन यादों में हम
आंख मिचोली का खेल खेले हैं हम । गांव की उन गलियों में घूमे हैं हम ।। गले में हाथ डाल साथ घूमे हैं हम । नीम की उस डाली पे खेले है हम ।। द
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उम्र और ज़िंदगी का तक़ाज़ा देखो
यह उम्र और- ज़िंदगी का तक़ाज़ा देखो अपनें किनारा- कर लें अपने को, समझा लो उम्र हो गई इससे पहले जो था- वह ज़िंदगी गुज़ार ली तुमने सि
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खुशबू बिखेर दूं दिले जहां में
तमन्ना-ए-दिल थी- खुशबू बिखेर दूं दिले जहां में मेरे पवित्र- प्रेम का हल्ला मचा दिया, कुछ खास हैं जो अपनों में दिल- तोड़े टुकड़े भी जल�
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एक बीज को- इंतजार है धरती का
एक बीज को- इंतजार है धरती का, पानी का-सूरज की गर्मी का और ऋतु का- फिर अपने आप, जीवन पनपने को आतुर है जीवन- का तत्व जो बीच के अंदर है, यह ज
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मोहब्बत चीज ही ऐसी है
कभी किसी की- सूरत इतनी अच्छी लगती है बुराई को ही निगल जाती है,, मोहब्बत चीज ही ऐसी है- सब नजर अंदाज कर जाती है -मोती
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स्त्री-स्त्री बनकर जीना आसान नहीं
स्त्री... यह छोटा सा शब्द है, मगर स्त्री बनकर जीना आसान नहीं। स्त्री तो होती हैं धरती कैसे? जी हाँ, स्त्री तो बिल्कुल धरती समान हैं। स्त
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दोस्ती इस दुनिआ का खूबसूरत रिश्ता है
दोस्ती इस दुनिआ का खूबसूरत रिश्ता है , दोस्ती मजबूत होनी चाहिए । दोस्ती होनी चाहिए तो सुदामाजी और श्रीष्णजी , जैसी ही होनी चाहिए । द
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जीवन कोरा है लिख लीजिए
जिंदगी इनायत है- खुद को खुश रखिए, जीवन कोरा है लिख लीजिए आपके हाथों को- कुदरत ने यह स्वतंत्रता दी है -मोती
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जीवन के- इस पल की सानी नहीं
एक मां जब- बच्चे को जन्म देती है अपार- खुशियों से भर जाती है जीवन के- इस पल की सानी नहीं जब मनुष्य- द्विज बनता है, सोलह संस्कारों में
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प्रेम की जुबान में
प्रेम की जुबान में- तू मैं और हया नहीं होती होती जहां भी- वह सिर्फ एहसास में होती -मोती
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शांति सर्वोच्च एवं शाश्वत है
शांति- सर्वोच्च एवं शाश्वत है, जिसे अपना करके मनुष्य आनंद के अनंत- सागर में गोता लगा सकता है -मोती
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