ताउम्र जिस घरौंदे को ,
संवारने में निकाल दी ।
सब उड़ चले मुझे भी,
निकलने की सलाह दी।
जाओ..... सब के सब
मर्जी तुम्हारी,
आंखों में दिख रही
ख� read more >>
स्वरचित रचना--- दूर हो या पास..........
संदर्भ--- दोस्ती!
दूर हो या पास
दोस्त तेरा अहसास!
बस मेरे लिए खास!
तू सलामत है तो,
मुझमें सलामत है सांस!
� read more >>
स्वरचित रचना---जुबां खामोश कहती है!
संदर्भित- ( At the deep love)
जुबां खामोश कहती है,
कहीं तो कुछ तो ऐसा है!
गुम हुआ होश कहता है
कहीं तो कुछ तो ऐसा � read more >>
जब आंख खुली तो मां की गोदी का एक सहारा था,
उसका आंचल मुझको भूमंडल से प्यारा था ,
उसका स्तन पान किया तो मैंने जीवन पाया था,
मुझको बढ़ता दे� read more >>