किसी ने क्या खुब कहा है जब तक कडकती धुप से हमारे पाव ना जले तब तक हम आपने कदम छाया कि ओर जल्दी जल्दी नही बढाते हैं, ठीक उसी प्रकार जब तक जि� read more >>
हो कोई भगीरथ, जो गंगा को धरा पर ला सके।
दीन- हीन शोषित नर जिसकी, निर्मल धारा में नहा सके।
भ्रष्टाचार के पेड़ को, जो नष्ट कर दे जड़ सहित।
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// सुप्रभात ...
सुबह हो गई ,
चल बेटा उठ ...!
उठ बेटा उठ ,
बहुत गया सुत ...!
जो सोया ,
वो खोया ...!
जो जागा ,
वो पाया ...!
समझ में तेरे ,
तुझे...आया कुछ ...!
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कोई अगर आपके गलत व्यवहार
को सहन कर रहा है ना
तो इसका मतलब ये नहीं है
कि वो आपसे डरता है
ये उसके संस्कार हैं
और वह सब्र है
जो उसे बार-बार � read more >>