कुछ नहीं बदला है
गर्दन बही है बस
जलाद बदला है
हम और आप बो ही है
बस एक और
तलबार बदला है
सब कुछ जस के तस है
बस हमारी गर्दनों को
जो काट सके
� read more >>
// बेवफा कहां लिखते हैं ......
हम जानते है कि -
आप अपनी दुनिया में ,
रहकर भी हमें ,
अपने मन में रखते हैं ...!
हम तभी तो ,
कल भी आपसे
जितना प्यार � read more >>
मैं हारा, थका, बड़ा हुआ, लड़खड़ाते कदमों के बल खड़ा हुआ,
कई बार आईं अटकलें, खुद से मैं रूठा,
दुनिया हंसेगी मुझपर इस बात से मन टूटा।
ये गिरने के read more >>
बड़े नादां हो सनम, माहताब मांगते हो //
अंधे की आंखों से, इक खा़ब मांगते हो //
फुलों के शहरों से, खुशबु बेच आने पर //
तुम तो बिन कांटे की, गुला� read more >>
न मिलना मुझे आसानी से तुम,
बस पथिक मुझे बनाए रखना,.
मिलना मुझसे जब मन हो तेरा,
बस मिलन की आस मुझमें जगाए रखना,.
जो आनंद है स्नेह डगर में ते� read more >>
*मौन एक कविता की तरह है*
______________________
कुछ आँखों के माध्यम से बोलते हैं,
कुछ लोग मौखिक रूप से बोलते हैं,
कुछ लोग संकेतों से बोलते हैं,
कुछ लोग � read more >>
"अब हमारी बारी है"।
पढ़ा लिखाकर बड़ा कर दिया,
अब माँ-बाप की खत्म हुई ज़िम्मेदारी है।
हमारे कंधों पर अब उनकी ज़िम्मेदारी है।
कुछ बन कर द� read more >>