सजा के मंडी -
गद्दी पे बैठ कर ;
ढोंग रचा रहा पाखंडी ,
ले के सब से वोट -
आघात किया दे के -
सब को चोट ;
तू भूल गया -
अपना परिचय ,
जो भी है तू -
है अप� read more >>
था कर गुज़रने का जज़्बा, ज़िंदगी पल भर की।
अग्नि में तपकर एक लोहा, फाल बन गया हल की।
धरती के दामन के संग, कृषक का हमराही।
घिस -घिसके घिस ग� read more >>