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পরম সু:খম সন্তাপ করম
পরম সূ:খম সন্তাপ করম, অভিদা , নিবিদা পরবস্তী তে! এই মনের নগরকে উচ্চো রাখে, কোতোই বেদনা হারিযে দে।। আপ: হৃদয জোদী কষ্ঢে থাকে,
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मीली हवाओं मे खूशबू
मीली हवाओं मे खूशबू, मूझको लगता कूछ यहां वहां! है एक पहर मे र्दद कई, कूछ अपनो सा कूछ सपनो सा!! झकझोर रही है दृश्य सभी, अ
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चलती है हवा
चलती है हवा ले अधरों से, बिते सारे ऐहसास कई! कूछ उठी धूनी सी सिमट गई, अरमानो के ज़सबात लिए!! ज़सबातो की ले करूण कथा, कि
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बस एक नाम बस नाम नाम
है अविचलताओं कि करूण धरा, मिट्टी आज़ादी की निशानी है! है शुज्ला, सफ्ला देश मेरा, वतन परस्ती जिसकी कहानी है!! हर ज़र्रों के एहसा
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माधुर्य मधूर वाणी कि दिशा
माधुर्य मधूर वाणी कि दिशा, निज कर्मो से मै रोक पाता! कर्म को मिलता तनिक छाह, गर कर्मो से राह मुझे मील जाता!! अविचलता कि हुंकारों स
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अरूनोदय की आश लिए
मैं सोंच रहा था पवन तपोवन, अंतर मन के दृड़ चेतन से! अंधकार की विफल चेष्टा, अरूनोदय की आश लिए!! करूण चेष्टाओं की ध्वनी,
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दिपावली
बालमिक रिषी कर्मों को, करता हूं नमन मैं श्रद्धा से! तूलसी को नमन है कोटी - कोटी, मेरी प्रमार्थ की अविधा से!! चरितार्थ नाम को दिव�
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महा पूरूषोत्तम-शीव संकर
महा पूरूषोतम शीव संकर, दया दान के दाता है! पूरुषार्थ मर्यादा के पालक, शीव चरण मे शीश नवाता है!! जन्म - जन्म के दू:ख: हरता,
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नमो नमो शीव हरे हरे
राजा सगर दिग्गज रण विजयी, धरती पे ऋश्र बड़ाने को! कर रहे थे धरा पर महा यज्ञ, देव राज कहलाने को!! मानव कल्याण के सत्य धर्म,
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नमो नमो शीव हरे हरे 02
समर विशोनित सूर्यवंश, भगिरथ के वंश मे जन्म लिए, दशरथ नंदन श्री राम चन्द्र, रघू कूल के रीत के पालक थे!! रावण मृत्यू पश्चात राम को,
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रश्मी रथी बनु
समा बांध अविराम करे, आशाओं के चाहत पल पल! नयनो के गतीमय प्रगतीमान, उठती है दर्रख्तें कल कल कल!! अती अती अतिश्य चर्म कर्म,
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टिकाकरण अधिकार अपना
कर्म योग अती पावन निष्ठा, छल भी छलीत हो जाती है! बलवान कि हिम्मत भी आकर, अधरों मे दलीत हो जाती है!! पर्वत कहां झुकते है नदियों
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