मेरा चाँद... (शीर्षक)
उस मुडेर पर ,पता नहीं
क्यों रुका है, मेरा चाँद,
क्या उसको घर का पता नही,
क्या अपनों के दिल दुखाने की
खता तो नहीं?
कभी � read more >>
जलती आग के सरारे हुआ करते थे,
कभी तो हम भी यूँ कुँवारे हुआ करते थे।
थोड़े नमकीन और करारे हुआ करते थे,
कभी तो हम भी यूँ कुँवारे हुआ करते थ� read more >>