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दिल को किसी से गिला नही
दिल को अब किसी को गिला नही मन से जो चाहा वो मिला नही बदनसीबी कहु या वक्त की बेवफाई अँधेरे में एक चिराग मिला पर वो भी जला नही
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महोब्बत की शमा
महोब्बत की शाम जला के तो देखो जरा दिल की दुनिया सजा के तो देखो तुम्हे हो जाये ना महोब्बत हमसे तो कहना जरा हमसे नजरे मिला के तो देखो
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फूल बिना परफ्यूम के महकता है -मुक्तक
फूल बिना परफ्यूम के महकता है तारा बिना सूरज के दमकता है कपड़ो की परवाह तुझे क्योँ हो रूप तो तेरा साड़ी में भी चमकता है उंची इमारतों मे�
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आज भी मेरी ओकात पता ।
उसका वो झूठ , किसी चोट से कम नही था । वही एक दर्द लब्जों , मुझे , याद दिलाता है। आज भी मेरी ओकात पता ।
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जीवन जवान
जीवन जवान का खेल है, जो समझ गया वो तर गया।।
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गुस्ताखियाँ करते रहे।
हम उनकी गुस्ताखियों को उनकी नासमझी समझ कर यूँ ही माफ़ करते रहे। और एक वो थे कि गुस्ताखियों पर गुस्ताखियाँ करते रहे। सचिन कुमार सोनकर
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रिम झिम की प्यारी बूंदे लेके आयी बरसात
रिम झिम की प्यारी बूंदे लेके आयी बरसात याद आया किसी से हुई थी पहली मुलाकात, अजब गजब से ये बूंदे देखती हूं बारिश में बदन जलता है फिर भी �
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यूं हीं चलता गुज़र जाता ज़िंदगी....
यूं हीं चलता- गुज़र जाता ज़िंदगी सफ़र की- अहमियत हो गर ज़रा तो जनाब- दिल में हाथ रख जरा ऐसा ना- कोई संत ना सद्ग्रंथ धरा में जो- ना गा�
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पलकों के छांव में....
पलकों के छांव में हर वक्त, मेरे एहसास के तले गुजरता। तुम्हारा यह सूरत मेरे सीरत, का अब मकसद बन गया है।। -मोती
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दर्द-ए-दिल से सूर....
दर्द-ए-दिल से सूर-ए-नगमा, तुम्हारे ही नाम लिखता। मिटाता हूं जमी पर सूर बन, आते दिल के आंसू रोते हैं।। -मोती
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अब भी प्यार करते हो
एक दिन, उन से उनकी तबीयत पुछने गए थे। हम वो हमसे हमारा ही, हाल पूछने लगे । बदमाशीयाँ तो देखो। उनकी घीरे -धीरे वो हमसे फिर वही सवाल �
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अकेले हो तो बिचारों पर काबू रखो
अकेले हो तो बिचारों पर काबू रखो और सबके साथ हो तो जुबान पर काबू रखो..!!
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