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जिस शख्स के सिवा मुझे कोई दूसरी चाह नहीं है
मेरे आंसुओं की उसे परवाह नहीं हैं जिस शख्स के सिवा मुझे कोई दूसरी चाह नहीं है #गोपाल_पंडित
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हे नीली छतरी वाले- हे शिव गुरु तू जगत का
हे नीली छतरी वाले- हे शिव गुरु तू जगत का, करतार तू ही सबका तारणहार तेरी यह दुनिया- तुझसे छुपी कहां है, तू ही जाने तेरी अद्भुत कहानी मै
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बेसुध बहे संसार सागर की धारा
बेसुध बहे- संसार- सागर की धारा! बेसुध बह जाता- वह जो संभलना पाता सत्य की धारा- माया भी बहती जाती अमृत की धारा- विष भी बहती जाती जो र�
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हसरतें दिल की दवी रह गई
हसरतें दिल की दवी रह गई जुवान से न निकला लफ्ज़ कोई सपने तो थे सुनहरे कई जो सपने में ही, कहीं खो गई।
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बदल गइल बा जमाना
र्मद पकाबे खाना, मेहरारू जोते खेत। भैया हो, बदल गइल बा जमाना।।
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तू जान थी कभी
तू जान थी कभी अरमान थी कभी मेरी बुझती सासों की तू चीराग थी कभी तुझे चाहा था इश्क़ से ज्यादा पर मैं समझ न पाया तेरा इरादा इस लिए तू इश�
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तू इश्क़ लगी विस्क लगी
तू इश्क़ लगी विस्क लगी सच कहु तो प्रीत लगी तेरी बातों के मिठास में ना जाने क्यों मित लगी जब से मिला हैं शब्दों से शब्द ना जाने क्यों �
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लोग कहते हैं शहर में फिर बरसात हो रही है
लोग कहते हैं शहर में फिर से बरसात हो रही है किसीसे ये मत कहना कि यह प्रकृति मेरे साथ रह रही है एक कहानी थी जो अधूरी रह गई थी कभी तनहा ही स
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घर से दूर शहर में
ढलते ढलते साम की कदर हमसे पूछिए इक रात नही हर रात का सफर हमसे पूछिए मुद्दतो में पहुंचे है एक घर में कहीं अपने घर से दूरी
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आ गया संस्कार शिष्टाचार का नया चलन है
आ गया संस्कार- शिष्टाचार का नया चलन है!! हर-कोई- दीवाना और दीवानी हैं जगह-जगह- इश्क़ के कंपनी खुले हैं, मोबाइल ने तो लूट लिया सारे ज़म�
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उनकी सासो कि गर्माहट-दूर से भीं तपन देती हैं
उनकी सासों कि गर्माहाट, दूर से भीं तपन देती हैं पास आकर उनके ,होश बिखरने लगती हैं
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मैं चाहता था वो मेरा ख्याल रख लेता
मैं चाहता था कि वह मेरा ख्याल रख लेता मेरे लिए जीना शायद कुछ आसान हो जाता मुझे छोड़ने से पहले अगर वो मेरा ख्याल कर लेता #गोपाल_पंडित
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