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आँखों की नमी
"नमी" "मेरे पास अल्फ़ाज नहीं हैं,उसकी मोहब्बत् को बयाँ करने के लिये मगर आँखों की नमी,सब कुछ बयाँ कर रही है,उसकी मोहब्बत् के बारे में"
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शौकबंद गुमानी
मै हिसाब नहीं रखना । कभी अपनी, वादिल मस्ती यों का हर लम्हा तो मुझे जीना है । यहाँ शौकबदं गूमानी मे , फिक्र मुझे क्यों ? फिक्र तो �
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दिल से शायरी
अक्सर किसी की वेरुखी किसी की निंद और चैन छिन लेते हैं और उस सख्स को कोई फर्क ही नहीं पड़ता है ।
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मेरा हौसला मेरे साथ है
ज़माना खिलाफ था ज़माना खिलाफ है पर ज़माने को कौन बताएं कि, मेरा हौसला मेरे साथ है
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कोई बात नहीं
तू हैं तो मगर पास नहीं धड़कनों में जैसे जज्बात नहीं तन्हा तन्हा खोया खोया कोई तुझ में एहसास नहीं तुझ में ही उलझा मेरा जान लेकिन तू म�
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बिंदास उड़ता हैं
बिंदास उड़ता हैं तू हवाओं में बिना पंख बिंदास उड़ता हैं क्या चाहिए जो इतना बे फ़िक्र आशमान को छूता हैं मैं नहीं जनता क्या चाहिए जो तू
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क्या तू सच में हैं
क्या तू सच में हैं कहा हवाओं में या फिजाओं में या फिर तमनाओ में क्या तू सच में हैं मैं सोचता हूँ पर कहा क्यों कैसे किस लिए तू हैं तो
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मेरे बातों में
जिस्म खामोश मगर मन बोलता हैं रूह चुप चुप फिर भी कुछ राज़ खोलता हैं! जान बे जान मगर तू पुकारता हैं तन बदल गया रात सा ढल गया आग में जल �
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गर्दिश से बनूं सितारा
गर्दिशों में ठोकरें खा _खा कर कितने सितारों में तब्दील हो गए, क्या मैं गर्दिशों में ठोकरें खा कर सितारों में तब्दील नहीं हो सकता? संदी�
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ये रचयिता की है रचना....
ये मौसम खिलते बहारें यहां- सदियों से ये जिंदगी गुजर रहीं हैं ये रचयिता की है रचना- दया की ये देखो लहरें गुजर रहीं हैं -मोती
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हर रोज़ तुझे Yaad करूँ..
हर रोज़ तुझे Pyaar करूँ.. हर रोज़ तुझे Yaad करूँ.. हर रोज़ तुझे Miss करूँ… और आज के दिन में तुझे Kiss करूँ..
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तेरे दिल में उत्तर जाऊ तो मुझे माफ़ करना
अगर मै हद से गुज़र जाऊ तो मुझे माफ़ करना, तेरे दिल में उत्तर जाऊ तो मुझे माफ़ करना, रात में तुझे देख के तेरे दीदार के खातिर, पल भर जो ठहर जा
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