"उलझनों की भीड़ में लापता है जिंदगी,
सुबह से शाम तक खफा है जिंदगी,
क्या चाहती तू मुझसे ,
या क्या मैं चाहूं तुझसे ,
लौट आ एक हीं बार,
न आन� read more >>
"तू बिना हुए हताश,
बढ़ा अपने मन की आश,
ना हो परेशानियों से निराश,
कर्म पर रख तू विश्वास,
फल को छोड़ ऊपर वाले के हाथ,
बस बढ़ता चल बढ़ता चल, read more >>