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कहीं दीया जले कहीं दिल इए तो अपनी अपनी किस्मत है, खुदा जाने कब क्या हो यहां यहां तो वस उनकी ही रहमत है । read more >>
पत्थरों की सिने से कभी नदी भी बहती है सुना तो था, लेकिन यहां तो कोमल भी कातिल और पत्थर से भी कठिन हमें इन्सान नजर आते हैं। read more >>
वक़्त बुरा हो , हालात बुरा हो पर उसी वक़्त पता चलता है हमारे साथ कौन है। धन्यवाद read more >>
समय का चक्र बड़ा ही निराला होता है आज जो राजा है कल फकीर होता है। धन्यवाद read more >>
दिनाक→ (07/12/2022) बुधवार, शायरी→ जलने वालों को अलविदा ही ठीक हैं। शायार→ मोहम्मद फैजान सिद्धिकी'' पिता-रईस अहमद सिद्धिकी'' अजी जानाब ह� read more >>
दुनिया में- झूठ चले बिना पैर, मन फ़िरे लोक-परलोक मेला लगा माया का- जिसमें फिरता एक मुसाफ़िर आती-जाती हरेक श्वास में- कटती है यह जीवन क read more >>
दिल के बाजार में सबसे गरीब हम है ख्बाव की दुनिया में बदनसीब हम है हमारे लिए उनके पास वक्त ही नही और लोग कहते है उनके सबसे करीब हम है read more >>
दिनाका - (05)/12/2022) (गटबन्धन) शाईरी सोमवार | शायार-लेख, मोहम्मद फैजान सिद्धिकी: पिता रईस अहमद सिद्धिकी. जब दो दिल- आपास में। मिलते हैं। तो � read more >>
ना जरूरत तारो की ना तमन्ना है सितारों की जब तुम जैसे दोस्त हो क्या जरूरत है इन बाहरो की अरुन कुमार सिरसवाल read more >>
किसी-किस ने पारलेमैंट को हग-हग के सड़ा रखा है। हर एक गू की लेनड़ी को पारलेमैंट को का एम्पी बना रखा है। भारत देश के गदारों को नगे कर दो ना को� read more >>
ये दिल, मुहोबत, तो चाहता है! बेशक, हाँ , ये मेरा ये दिल, पागल मुहोबत तो चाहता है ! पर यहाँ चहरो पे नकाब देख कर धडकने खामोश रह जाती है। read more >>
दूसरों के चीजों पर हमारी दृष्टि बहुत जल्दी चली जाती और अपने, अच्छे चीजों को भी हम नजरअंदाज कर देते हैं धन्यवाद read more >>
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