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जिंदगी इतनी नासूर बन जाएगी सोचा न था जिससे दिल लगाई वही मुंह मोड़ जाएगा सोचा न था हमने तो सिर्फ मोहब्बत चाहा वो किसी और को चाहेगा सोचा � read more >>
रेगिस्तान के बालू में तेरी मरीचिका दिख रही क्या बात हो गई मेरी मोहब्बत में की कुर्बत अब दूरियों में तब्दील हो गई। धन्यवाद read more >>
यादें तुम्हारी खुशबू बिखरे तन्हाई की हर आलम में, भुल गए तुम हम न भूलें के तुम हो सामिल हरपल हमारी सासों में read more >>
तुम्हे चाहा है इस कदर के किसी और की चाहत न होगी , भले तुम हमसे नाराज़ भी रहो मोहब्बत की उम्मीद बस तुमसे ही होगी। read more >>
कहीं दीया जले कहीं दिल इए तो अपनी अपनी किस्मत है, खुदा जाने कब क्या हो यहां यहां तो वस उनकी ही रहमत है । read more >>
पत्थरों की सिने से कभी नदी भी बहती है सुना तो था, लेकिन यहां तो कोमल भी कातिल और पत्थर से भी कठिन हमें इन्सान नजर आते हैं। read more >>
वक़्त बुरा हो , हालात बुरा हो पर उसी वक़्त पता चलता है हमारे साथ कौन है। धन्यवाद read more >>
समय का चक्र बड़ा ही निराला होता है आज जो राजा है कल फकीर होता है। धन्यवाद read more >>
दिनाक→ (07/12/2022) बुधवार, शायरी→ जलने वालों को अलविदा ही ठीक हैं। शायार→ मोहम्मद फैजान सिद्धिकी'' पिता-रईस अहमद सिद्धिकी'' अजी जानाब ह� read more >>
दुनिया में- झूठ चले बिना पैर, मन फ़िरे लोक-परलोक मेला लगा माया का- जिसमें फिरता एक मुसाफ़िर आती-जाती हरेक श्वास में- कटती है यह जीवन क read more >>
दिल के बाजार में सबसे गरीब हम है ख्बाव की दुनिया में बदनसीब हम है हमारे लिए उनके पास वक्त ही नही और लोग कहते है उनके सबसे करीब हम है read more >>
दिनाका - (05)/12/2022) (गटबन्धन) शाईरी सोमवार | शायार-लेख, मोहम्मद फैजान सिद्धिकी: पिता रईस अहमद सिद्धिकी. जब दो दिल- आपास में। मिलते हैं। तो � read more >>
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