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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जिंदगी तो सेलिब्रेटी की ही गुलाम है शाहब,क्योंकि गरीब लोग कम उम्र में ही मर जाते है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
दुनिया में जन्म लिए हो तो जीने का कोई मकसद रखो,लेकिन सिर्फ जिंदगी काटने का मन है तो मर क्यों नहीं जाते।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम जिन्दो को क्यों जिन्दा कह रहे हो क्योंकि यहां जिसने भी मोहब्बत की है सब मुर्दा ही तो है,और मुर्दों से कभी वफा नही मिलती।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
शुक्र है कि शाजहाँ ने वफा ख़त्म होने से पहले ही ताजमहल बना दिया था।लेकिन मारने से पहले मोहब्बत खत्म होती तो, ताजमहल नहीं समशान महल बन�
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम कमजोर नहीं हो शाहब,तुम्हारी मजबूरी ने तुम्हें घुटनों पर गिरा रखा है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कोशिश करो तबतक जबतक जिंदगी को गुलाम न बना लो,क्योंकि अब तुम्हें ही फैसला करना है,जिंदगी को गुलाम बनाओगे या तुम खुद गुलाम बन जाओगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब को पता है मोहब्बत सिर्फ जिस्मों को पाने के लिए किया जाता है,लेकिन फिर भी लोगों को इज्जत नीलाम करने का शौख है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जबानी बीच उठ रही है जनाजा लोगों की लेकिन मोहब्बत का जनाजा कब उठेगी जो आमिर लोगों ने गरीबों से छीन ली है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम दुनिया में खुद से नही आए हो जो खुदा बने हुए हो,क्योंकि खुद से सिर्फ खुदा आया है इंसान नही।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुझे मेरी आत्माओं से मोहब्बत नही है, क्योंकि मेरी वे बसी ने तुझे मुझ से दूर कर दिया है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
चेहरा देख कर मोहब्बत करने वाले लोग इंसानों में कुत्तों के जैसा वफा ढूंढ़ते हैं।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
कौन नही चाहता है हसना शाहब,क्योंकि यहाँ लोग मोहब्बत करके वफा छीन लेते हैं।
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