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हर पल जीवन से रहता मैं रूबरू
कारण ना कोई परमानंद के सिवा नहीं कार्य कोई परमानंद के सिवा हे राम तू रहीम तेरे प्रेम में सदा मैं रूबरू हर पल-ए-जीवन से रहता मैं रूबरू -�
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बहाने ढूंढ रहे थें दूर होने की
✍️बहाने ढूंढ रहे थें दूर होने की सो ढूंढ लिया जुदाई सहना मुश्किल था पर सह लिया😔 धन्यवाद
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लोगों की परवाह तुम करो
🍁लोगों की परवाह तुम करो हमें कोई गम नहीं पर जब तुम्हें हमारी फिक्र होगी उस वक़्त शायद हम नहीं✍️ धन्यवाद
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गुज़रे-ए-परमानंद में 2025 तुम्हारा
गुज़रे-ए- परमानंद में 2025 तुम्हारा, गमों से- तू रहे दूर यह दुआ है हमारा, ये वक्त है तुम्हारा- कर ऐसा दुनिया हो तुझ जैसा, हरेक सांस में-
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पुराना-पुराना सा मेरा हाल है
पुराना-पुराना सा मेरा हाल है लोग कह रहे आज नया साल है - त्रिशिका धरा
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रातों के ख्यालात...
जो जता सके वह दर्द नहीं जो बता सके वह लफ्ज़ नहीं, तुम्हारा रूठना आसमा बराबर, तुम्हें लाखों बार मनाने पर भी हमें हर्ज नहीं... मुस्कुरा दी�
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दर्द
मेरे दर्द की वजह भी तू मेरे दर्द का मरहम भी तू धन्यवाद
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मौत की सहनाई गूंजने लगी है
मौत की सहनाई गूंजने लगी है हरतरफ शोर मचने लगी है कौन देखेगा कल का सवेरा ऐ भी किसी को मालूम नहीं है!!😔 धन्यवाद
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बात कुछ ऐसी थी
😔बात कुछ ऐसी थी कि कहा भी ना गया चुप रहा भी ना गया आंखों से ही बयां करना चाहा पर कुछ ऐसे मसरूफ थें कि हमारी ओर उनकी नजर उठा ही ना गया💔. ध�
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जागता
तुम ढलती हुई दिसम्बर देख रही हो.. और मैं जागता हुआ जनवरी हुँ..
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सुकून
जिम्मेदारी अब अपनी जिद्द में है..! और मैं सोया हुआ सुकून ढूंढ रहा हूँ...!!
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अभिनय
मैंने तुम्हारें अभिमान का अभिनय देखा है..! अब तुम मेरे अनुभव का अनुमान देखना....!!
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